उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में करीब 2 साल 8 महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद कोटद्वार की अदालत ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या का दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई। इस मामले की जांच एसआईटी ने की थी, जिसने 500 पन्नों के दस्तावेजों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 97 गवाहों के बयान शामिल थे। कोर्ट ने पीड़ित परिवार को ₹4 लाख का मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

मामला दर्ज होने से फैसला आने तक
यह केस सितंबर 2022 में दर्ज हुआ था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुनाया। अंकिता वनतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी, उस रिज़ॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य था। पुलकित पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का पुत्र है। मामले के सामने आते ही पार्टी ने विनोद आर्य को निष्कासित कर दिया था।
घटनाक्रम
- 28 अगस्त 2022: अंकिता ने यमकेश्वर स्थित वनतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में नौकरी शुरू की।
- 17 सितंबर 2022: पुलकित आर्य से बहस हुई, जिसके बाद उसे अलग कमरे में भेज दिया गया।
- 18 सितंबर 2022: अंकिता लापता हो गई।
- 19–22 सितंबर 2022: परिजनों ने कई थानों में शिकायत की, लेकिन शुरू में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
- 24 सितंबर 2022: ऋषिकेश की चीला नहर में अंकिता का शव बरामद किया गया। जांच में पाया गया कि पुलकित, सौरभ और अंकित ने उसे नहर में धक्का दिया था। तीनों को गिरफ्तार किया गया।
SIT की कार्रवाई
- उत्तराखंड सरकार ने घटना की गंभीरता को देखते हुए अक्टूबर 2022 में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच में SIT ने गैंगस्टर एक्ट के तहत धाराओं में मामला दर्ज किया।
- दिसंबर 2022 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें पुलकित पर हत्या, छेड़छाड़ और अनैतिक गतिविधियों के आरोप लगाए गए।
अदालती कार्यवाही
- 30 जनवरी 2023: उत्तराखंड राज्य की कोटद्वार की अदालत में केस की पहली सुनवाई शुरू हुई।
- 28 मार्च 2023: अभियोजन पक्ष ने गवाह पेश करने शुरू किए। 97 में से 47 गवाहों को अदालत में प्रस्तुत किया गया।
- अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस कई महीनों तक चली।
- 19 मई 2025: करीब 32 महीने की सुनवाई के बाद 19 मई 2025 को अभियोजन पक्ष के वकील अवनीश नेगी ने अंतिम बहस रखी।
- 30 मई 2025: 30 मई 2025 को अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
