रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग थमने का नाम नहीं ले रही। अब इस युद्ध में यूक्रेन ने एक बड़ा हमला कर सबको चौंका दिया है। यूक्रेन ने रूस के पांच प्रमुख सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त ड्रोन हमला कर दिया। इस ऑपरेशन में 117 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया और इसके जरिए 40 रूसी फाइटर जेट और 5 एयरबेस तबाह कर दिए गए।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस सफल ऑपरेशन की जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिए दी। उन्होंने यूक्रेन के सुरक्षाबलों और ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और बताया कि इस हमले की रणनीति डेढ़ साल पहले तैयार कर ली गई थी।

जेलेंस्की ने क्या कहा?
जेलेंस्की ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा —
“यूक्रेन के सुरक्षा अभियान प्रमुख वसील मालियुक ने आज के ऑपरेशन की रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने बताया कि यह अब तक का हमारा सबसे लंबी दूरी वाला और अत्यधिक सफल मिशन रहा है। इस रणनीति की शुरुआत 1 साल, 6 महीने और 9 दिन पहले की गई थी। ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को वक्त रहते रूसी इलाकों से सुरक्षित वापस बुला लिया गया। अभी इस मिशन से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं, लेकिन इसका उल्लेख भविष्य में इतिहास की किताबों में जरूर होगा।”
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस अभियान की सफलता और इससे जुड़ी जानकारी जनता के साथ साझा करें।
रूस का क्या कहना है?
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेनी ड्रोन हमले में उनके पांच एयरबेस को निशाना बनाया गया। मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाजान और अमूर में ड्रोन हमले किए गए। रूस ने दावा किया कि कुछ हवाई अड्डों पर हुए हमलों को विफल कर दिया गया, जबकि मरमंस्क और इरकुत्स्क में कुछ विमानों में आग लग गई थी, जिसे समय रहते बुझा दिया गया।
रूसी मंत्रालय ने इस हमले को आतंकी कार्रवाई बताया है।
ऑपरेशन की खास बातें
- 117 ड्रोन का एकसाथ उपयोग
- 40 रूसी लड़ाकू विमानों को नष्ट किया गया
- 5 एयरबेस पर हमला
- करीब 34 फीसदी रणनीतिक क्रूज मिसाइल ले जाने वाले विमानों को भी इस ऑपरेशन में नुकसान पहुंचाया गया।
जेलेंस्की का दबाव बढ़ाने की रणनीति
जानकारों का मानना है कि यूक्रेन ने ये हमला इस्तांबुल में प्रस्तावित शांति वार्ता के दूसरे चरण से पहले रूस पर दबाव बनाने के लिए किया है। रूस का प्रतिनिधिमंडल पहले ही तुर्किए पहुंच चुका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल युद्धविराम की उम्मीद बेहद कम है।
